बुधवार, 13 जुलाई 2022

😃काश! 😞


व्यतीत करना चाहती हूँ ...
सिर्फ एक दिन...
खुद के लिये...
जिसमें न जिम्मेदारियों का दायित्व हो
न कर्त्तव्यों का परायण
न कार्य क्षेत्र का अवलोकन हो
न मजबूरियोँ का समायन
बस मैं ,
मेरे पल ..
मेरी चाहतें और 
मेरा संबल
एक कप काफी से
हो मेरे दिन की शुरुआत
भीगकर अतीत के लम्हों में
खोजू अपने जज्बात
भूल गई जो जिंदगी जीना
उसे फिर से याद करु..
सबकी खातिर छोङ चुकी जो
उन ख्वाईशों की बात करु..
उलझी रहू बस स्वयं में ही
न कोई हो आस पास...
जी लू जी भर उन लम्हों को
जो मेरे हो सिर्फ खास..
मस्त मगन होकर में नाचूँ
अल्हङपन सी मस्ती में
जैसे चिङिया चहक रही हो
खुले आसमान सी बस्ती में..
मन का पहनू,
मन का खाऊं
न हो और किसी का ख्याल...
भूल गई हू जो जीना मैं
फिर से न हो मलाल..
शाम पङे सखियों से गपशप
और पानीपूरी खाऊं
डाक्टर के सारे निर्देशों को
बस एक दिन भूल जाऊँ..
मस्त हवा संग बाते करु
खुली सङक पर यूंही चलू..
बेफिक्री की राह पकङकर
अपनी बातों की धौंस धरु..
रात नशीली मेरे आंगन
इठलाती सी आये
लेकर अपनी आगोश में
चांद पूनम का दिखलायें...
सोऊं जब सपने में मुझे
वो राजकुमार आये
परियों की दुनियां से होकर
जो मेरे रंग में रंग जाये..
एकसाथ में बचपन ,
यौवन
फिर से जीना चाहती हूं..
काश! मिले वो लम्हेँ मुझको
 एक दिन अगर जो पाती हू...

सोमवार, 11 जुलाई 2022

*अंजाना रिश्ता*


*मैं बिस्तर पर से उठा, अचानक छाती में दर्द होने लगा मुझे हार्ट की तकलीफ तो नहीं है? ऐसे विचारों के साथ मैं आगे वाली बैठक के कमरे में गया मैंने देखा कि मेरा पूरा परिवार मोबाइल में व्यस्त था
*मैंने पत्नी को देखकर कहा- "मेरी छाती में आज रोज से कुछ ज़्यादा दर्द हो रहा है, डाॅक्टर को दिखा कर आता हूँ* 
*हाँ मगर सँभलकर जाना, काम हो तो फोन करना"   मोबाइल में देखते-देखते ही पत्नी बोलीं*
*मैं एक्टिवा की चाबी लेकर पार्किंग में पहुँचा, पसीना मुझे बहुत आ रहा था, ऐक्टिवा स्टार्ट नहीं हो रही थी*
*ऐसे वक्त्त हमारे घर का काम करने वाला ध्रुव साईकिल लेकर आया, साईकिल को ताला लगाते ही, उसने मुझे सामने खड़ा देखा*
*क्यों सा'ब ऐक्टिवा चालू नहीं हो रही है?*
*मैंने कहा- "नहीं..!!*
*आपकी तबीयत ठीक नहीं लगती सा'ब,*
*इतना पसीना क्यों आ रहा है?* *सा'ब इस हालत में स्कूटी को किक नहीं मारते,* *मैं किक मार कर चालू कर देता हूँ ध्रुव ने एक ही किक मारकर ऐक्टिवा चालू कर दिया, साथ ही पूछा-* 
*साब अकेले जा रहे हो?*
*मैंने कहा- "हाँ*
*उसने कहा- ऐसी हालत में अकेले नहीं जाते,* 
*चलिए मेरे पीछे बैठ जाइये मैंने कहा- तुम्हें एक्टिवा चलानी आती है?*
*सा'ब गाड़ी का भी लाइसेंस है, चिंता  छोड़कर बैठ जाओ पास ही एक अस्पताल में हम पहुँचे ध्रुव दौड़कर अंदर गया और व्हील चेयर लेकर बाहर आया*
*"सा'ब अब चलना नहीं, इस कुर्सी पर बैठ जाओ"*
*ध्रुव के मोबाइल पर लगातार घंटियां बजती रहीं, मैं समझ गया था। फ्लैट में से सबके फोन आते होंगे कि अब तक क्यों नहीं आया? ध्रुव ने आखिर थक कर किसी को कह दिया कि* *#आज_नहीं_आ_सकता*
*ध्रुव डाॅक्टर के जैसे ही व्यवहार कर रहा था, उसे बगैर बताये ही मालूम हो गया था कि सा'ब को हार्ट की तकलीफ है* *लिफ्ट में से व्हील चेयर ICU की तरफ लेकर गया*
*डाॅक्टरों की टीम तो तैयार ही थी, मेरी तकलीफ सुनकर। सब टेस्ट शीघ्र ही किये*
*डाॅक्टर ने कहा- "आप समय पर पहुँच गये हो, इसमें भी आपने व्हील चेयर का उपयोग किया, वह आपके लिए बहुत फायदेमन्द रहा"*
*अब किसी की राह देखना आपके लिए बहुत ही हानिकारक है इसलिए बिना देर किए हमें हार्ट का ऑपरेशन करके आपके ब्लोकेज जल्द ही दूर करने होंगे इस फार्म पर आप के स्वजन के हस्ताक्षर की ज़रूरत है डाॅक्टर ने ध्रुव की ओर देखा* 
*मैंने कहा- "बेटे, दस्तखत करने आते हैं?"*
*उसने कहा-* 
*"सा'ब इतनी बड़ी जिम्मेदारी मुझ पर न डालो"* 
*"बेटे तुम्हारी कोई जिम्मेदारी नहीं है तुम्हारे साथ भले ही लहू का सम्बन्ध नहीं है,* *फिर भी बगैर कहे तुमने अपनी जिम्मेदारी पूरी की वह जिम्मेदारी हकीकत में मेरे परिवार की थी एक और जिम्मेदारी पूरी कर दो बेटा* *मैं नीचे सही करके लिख दूँगा कि मुझे कुछ भी होगा तो जिम्मेदारी मेरी है ध्रुव ने सिर्फ मेरे कहने पर ही हस्ताक्षर  किये हैं", बस अब... ."#और_हाँ_घर_फोन_लगा_कर_खबर_कर_दो"* 
*बस, उसी समय मेरे सामने मेरी पत्नी का फोन ध्रुव के मोबाइल पर आया। वह शांति से फोन सुनने लगा*
*थोड़ी देर के बाद ध्रुव बोला-* *"मैडम, आपको पगार काटने का हो तो काटना, निकालने का हो तो निकाल देना मगर अभी अस्पताल में ऑपरेशन शुरु होने के पहले पहुँच जाओ हाँ मैडम, मैं सा'ब को अस्पताल लेकर आया हूँ,* *डाक्टर ने ऑपरेशन की तैयारी कर ली है और राह देखने की कोई जरूरत नहीं है"*
*मैंने कहा- "बेटा घर से फोन था?"*
*"हाँ सा'ब"* 
*मैंने मन में पत्नी के बारे में सोचा, तुम किसकी पगार काटने की बात कर रही हो और किसको निकालने की बात कर रही हो?* *आँखों में आँसू के साथ ध्रुव के कन्धे पर हाथ रखकर मैं बोला- "बेटा चिंता नहीं करते"*
*"मैं एक संस्था में सेवायें देता हूँ, वे बुज़ुर्ग लोगों को सहारा देते हैं, वहां तुम जैसे ही व्यक्तियों की ज़रूरत है"*
*"तुम्हारा काम बरतन कपड़े धोने का नहीं है, तुम्हारा काम तो समाज सेवा का है, बेटा पगार मिलेगा*
*#इसलिए_चिंता_बिल्कुल_भी_मत_करना"*ऑपरेशन के बाद मैं होश में आया, मेरे सामने मेरा पूरा परिवार नतमस्तक खड़ा था। मैं आँखों में आँसू लिये बोला- "ध्रुव कहाँ है?"*
*पत्नी बोली- "वो अभी ही छुट्टी लेकर गाँव चला गया कह रहा था कि उसके पिताजी हार्ट अटैक से गुज़र गये है,* 
*15 दिन के बाद फिर आयेगा"*
*अब मुझे समझ में आया कि उसको मेरे अन्दर उसका बाप दिख रहा होगा*
*हे प्रभु, मुझे बचाकर आपने उसके बाप को उठा लिया?*
*पूरा परिवार हाथ जोड़कर, मूक, नतमस्तक माफी माँग रहा था*
*एक मोबाइल की लत (व्यसन) एक व्यक्ति को अपने दिल से कितना दूर लेकर जाती है, वह परिवार देख रहा था* 
 *यही नहीं मोबाइल आज घर-घर कलह का कारण भी बन गया है बहू छोटी-छोटी बातें तत्काल अपने माँ-बाप को बताती है और माँ की सलाह पर ससुराल पक्ष के लोगों से व्यवहार करती है, जिसके परिणाम स्वरूप  वह बीस-बीस साल में भी ससुराल पक्ष के लोगों से अपनत्व नहीं जोड़ पाती.* *डाॅक्टर ने आकर कहा- "सबसे पहले यह बताइये ध्रुव भाई आप के क्या लगते हैं?"*
*मैंने कहा- "डाॅक्टर साहब,  कुछ सम्बन्धों के नाम या गहराई तक न जायें तो ही बेहतर होगा, उससे सम्बन्ध की गरिमा बनी रहेगी, बस मैं इतना ही कहूँगा कि वो आपात स्थिति में मेरे लिए फरिश्ता बन कर आया था"*
*पिन्टू बोला- "हमको माफ़ कर दो पापा, जो फर्ज़ हमारा था, वह ध्रुव ने पूरा किया, यह हमारे लिए शर्मनाक है। अब से ऐसी भूल भविष्य में कभी भी नहीं होगी पापा"*
*"बेटा,#जवाबदारी_और_नसीहत (सलाह) लोगों को देने के लिये ही होती है*
*जब लेने की घड़ी आये, तब लोग  बग़लें झाँकते हैं या ऊपर नीचे हो जाते हैं*
*अब रही मोबाइल की बात...*
*बेटे, एक निर्जीव खिलौने ने जीवित खिलौने को गुलाम बनाकर रख दिया है अब समय आ गया है कि उसका मर्यादित उपयोग करना है*
*नहीं तो....*
*#परिवार_समाज_और_राष्ट्र को उसके गम्भीर परिणाम भुगतने पडेंगे और उसकी कीमत चुकाने के लिये तैयार रहना पड़ेगा"*
*अतः बेटे और बेटियों को बड़ा #अधिकारी या #व्यापारी बनाने की जगह एक #अच्छा_इन्सान बनायें*
         

शुक्रवार, 15 अप्रैल 2022

मेरी कलम

 मेरी कलम से मेरा है नाता पुराना 

बचपन से अब तक है अपना याराना 

जब जब हम साथ हैं होते

एहसास शब्दों में पिरों से जाते

मन के ख्यालों में एक लहर सी उठती

वो विचार कलम के जरिए पन्नों में उतरती

हर बार  नए विचार हैं उभरतें

कलम के संग  मिलकर हैं पूरें होते

कभी अलग रूप कभी अलग किरदार

 तेरे कारण कविता लिखती जोरदार

तुम मेरी भावनाएं मेरी ख्यालात लिखती

मेरे अनछुए  सब जज्बात लिखती

जिन विचारों में मैं खोई सी रहती

उनको तुम यथार्थ रूप देती

दुनिया कहां समझ है पाती

सजिवता का तुम एहसास कराती

खुद का परिचय कहां है देती

ये तो हमारा ही परिचय करवाती

हर गम को है लिख देती 

खुशी बयां है कर देती 

सब के विचारों को झकझोरती

‌ समाज में बदलाव है लाती 

जो हम जुबां से कह ना पाते

वह कलम सब कुछ है कह देती 

युग परिवर्तक हो जाती तेरी छवि

 सृजन में तुम हो जाती मेरी कवि

माना तुम हो निर्जीव सी

 पर कांति लाती हो सजीव सी

अपनी धुन में जब चलती हो

बहुतों के मन को खलती हो

सबको अधिकार दिलाती हो 

सबका भविष्य उज्जवल बनाती हो

तुम जन-जन की हो आवाज 

मेरे मन का बन जाती साज

आज भी तुम बहुत ही याद आती हो

कागज पर ना सही ख्यालों में तो आती हो


(अंजना सिंग जी की लिखी हुई है) 

शनिवार, 19 फ़रवरी 2022

*मर चुकी इंसानियत*

 सर्दियों के मौसम में एक बूढी औरत अपने घर के कोने

में ठंड से तड़फ रही थी।।

जवानी में उसके पति का देहांत हो गया था

घर में एक छोटा बेटा था, उस बेटे के उज्जवल भविष्य के

लिए

उस माँ ने घर-घर जाकर काम किया

काम करते-2 वो बहुत थक जाती थी,

लेकिन फिर भी आराम

नही करती थी वो सोचती थी जिस

दिन बेटा लायक हो जाएगा उस दिन आराम करूंगी।।

देखते-2 समय बीत गया!

माँ बूढी हो गयी और बेटे

को अच्छी नौकरी मिल गयी।

कुछ समय बाद बेटे की शादी कर

दी और एक बच्चा हो गया।

अब बूढी माँ खुश थी कि बेटा लायक

हो गया

लेकिन ये क्या

बेटे व बहू के पास माँ से बात करने तक का वक़्त

नही होता था

बस ये फर्क पड़ा था माँ के जीवन में

पहले वह बाहर के लोगो के बर्तन व कपड़े

धोती थी। अब अपने घर में बहू-बेटे

के...

फिरभी खुश थी क्योंकि औलाद

उसकी थी

सर्दियों के मौसम में एक टूटी चारपाई पर, बिल्कुल

बाहर वाले कमरें में एक फटे से कम्बल में सिमटकर

माँ लेटी थी

और सोच रही थी

आज बेटे को कहूँगी तेरी माँ को बहुत

ठंड लगती है एक नया कम्बल ला दे।।

शाम को बेटा घर आया तो माँ ने बोला...

बेटा मै बहूत बूढी हो गयी हूँ,

शरीर में जान नही है, ठंड सहन

नही होती मुझे नया कम्बल ला दे।

तो बेटा गुस्से में बोला, इस महीने घर के राशन में और

बच्चे के एडमिशन में बहुत खर्चा हो गया!

कुछ पैसे है पर तुम्हारी बहू के लिए शॉल लाना है

वो बाहर जाती है। तुम तो घर में

रहती हो सहन कर सकती हो।।

ये सर्दी निकाल लो, अगले साल ला दुंगा।।

बेटे की बात सुनकर माँ चुपचाप सिमटकर कम्बल में

सो गयी

अगले सुबह देखा तो माँ इस दुनियाँ में

नही रही...

सब रिश्तेदार, पड़ोसी एकत्रित हुए, बेटे ने

माँ की अंतिम यात्रा में कोई

कमी नही छोड़ी थी।

माँ की बहुत

अच्छी अर्थी सजाई थी!

बहुत महंगा शॉल माँ को उढाया था।।

सारी दुनियां अंतिम संस्कार देखकर कह

रही थी।

हमको भी हर जन्म में भगवान

ऐसा ही बेटा मिले!

मगर उन लोगो को क्या पता था कि मरने के बाद

भी एक

माँ तडफ रही थी।।।


सोमवार, 14 फ़रवरी 2022

*🙏 छोड दीजिए। 🙏*

 🙏🏼😊   *बुढ़ापे में इन्हें छोड़  दीजिए*   😊🙏🏼


एक दो बार समझाने से यदि कोई नही समझ रहा है तो सामने वाले को समझाना,

     🙏🏼   *छोड़ दीजिए*  🙏🏼


बच्चे बड़े होने पर वो ख़ुद के निर्णय लेने लगे तो उनके पीछे लगना,

     🙏🏼 *छोड़ दीजिए।*  🙏🏼


 गिने चुने लोगों से अपने विचार मिलते हैं, यदि एक दो से नहीं जुड़ते तो उन्हें,

     🙏🏼   *छोड़ दीजिए।*  🙏🏼 


 एक उम्र के बाद कोई आपको न पूछे या कोई पीठ पीछे आपके बारे में गलत कह रहा है तो दिल पर लेना,

     🙏🏼   *छोड़ दीजिए।*  🙏🏼 


अपने हाथ कुछ नहीं, ये अनुभव आने पर भविष्य की चिंता करना,

     🙏🏼   *छोड़ दीजिए।*  🙏🏼 


यदि इच्छा और क्षमता में बहुत फर्क पड़ रहा है तो खुद से अपेक्षा करना,

     🙏🏼   *छोड़ दीजिए।*  🙏🏼


हर किसी का पद, कद, 

मद, सब अलग है इसलिए तुलना करना,

     🙏🏼   *छोड़ दीजिए।*  🙏🏼 


बढ़ती उम्र में जीवन का आनंद लीजिए, रोज जमा खर्च की चिंता करना,

     🙏🏼   *छोड़ दीजिए।*  🙏🏼


उम्मीदें होंगी तो सदमे भी बहुत होंगे, यदि सुकून से रहना है तो उम्मीदें करना,

    *🙏 छोड दीजिए। 🙏*



शनिवार, 12 फ़रवरी 2022

बढ़ती उम्र का आनंद लीजिये🙏

 खुद को बढ़ती उम्र के साथ स्वीकारना एक तनावमुक्त जीवन देता है। 

हर उम्र एक अलग तरह की खूबसूरती लेकर आती है उसका आनंद लीजिये🙏

बाल रंगने है तो रंगिये, 

वज़न कम रखना है तो रखिये, 

मनचाहे कपड़े पहनने है तो पहनिए,

बच्चों की तरह खिलखिलाइये, 

अच्छा सोचिये, 

अच्छा माहौल रखिये, 

शीशे में दिखते हुए अपने अस्तित्व को स्वीकारिये। 

कोई भी क्रीम आपको गोरा नही बनाती, 

कोई शैम्पू बाल झड़ने नही रोकता,

कोई तेल बाल नही उगाता, 

कोई साबुन आपको बच्चों जैसी स्किन नही देता। 

चाहे वो प्रॉक्टर गैम्बल हो या पतंजलि .....सब सामान बेचने के लिए झूठ बोलते हैं। 

ये सब कुदरती होता है। 

उम्र बढ़ने पर त्वचा से लेकर बॉलों तक मे बदलाव आता है। 

पुरानी मशीन को Maintain करके बढ़िया चला तो सकते हैं, पर उसे नई नही कर सकते।

ना किसी टूथपेस्ट में नमक होता है ना किसी मे नीम। 

किसी क्रीम में केसर नही होती, क्योंकि 2 ग्राम केसर भी 500 रुपए से कम की नही होती ! 

कोई बात नही अगर आपकी नाक मोटी है तो,

कोई बात नही आपकी आंखें छोटी हैं तो,

कोई बात नही अगर आप गोरे नही हैं 

या आपके होंठों की shape perfect नही हैं....

फिर भी हम सुंदर हैं, 

अपनी सुंदरता को पहचानिए।

दूसरों से कमेंट या वाह वाही लूटने के लिए सुंदर दिखने से ज्यादा ज़रूरी है, अपनी सुंदरता को महसूस करना।

हर बच्चा सुंदर इसलिये दिखता है कि वो छल कपट से परे मासूम होता है और बडे होने पर जब हम छल व कपट से जीवन जीने लगते है तो वो मासूमियत खो देते हैं 

...और उस सुंदरता को पैसे खर्च करके खरीदने का प्रयास करते हैं।

मन की खूबसूरती पर ध्यान दो।

पेट निकल गया तो कोई बात नही उसके लिए शर्माना ज़रूरी नही।

आपका शरीर आपकी उम्र के साथ बदलता है तो वज़न भी उसी हिसाब से घटता बढ़ता है उसे समझिये।

सारा इंटरनेट और सोशल मीडिया तरह तरह के उपदेशों से भरा रहता है,

यह खाओ, वो मत खाओ 

ठंडा खाओ, गर्म पीओ, 

कपाल भाती करो,  

सवेरे नीम्बू पीओ,

रात को दूध पीओ

ज़ोर से सांस लो, लंबी सांस लो 

दाहिने से सोइये ,

बाहिने से उठिए,

हरी सब्जी खाओ, 

दाल में प्रोटीन है,

दाल से क्रिएटिनिन बढ़ जायेगा।

अगर पूरे एक दिन सारे उपदेशों को पढ़ने लगें तो पता चलेगा 

ये ज़िन्दगी बेकार है ना कुछ खाने को बचेगा ना कुछ जीने को !!

आप डिप्रेस्ड हो जायेंगे।

ये सारा ऑर्गेनिक, एलोवेरा, करेला, मेथी, पतंजलि में फंसकर दिमाग का दही हो जाता है। 

स्वस्थ होना तो दूर स्ट्रेस हो जाता है।

अरे! अपन मरने के लिये जन्म लेते हैं,

कभी ना कभी तो मरना है अभी तक बाज़ार में अमृत बिकना शुरू नही हुआ।

हर चीज़ सही मात्रा में खाइये, 

हर वो चीज़ थोड़ी थोड़ी जो आपको अच्छी लगती है। 

*भोजन का संबंध मन से होता है* 

*और मन अच्छे भोजन से ही खुश रहता है।*

*मन को मारकर खुश नही रहा जा सकता।*

थोड़ा बहुत शारीरिक कार्य करते रहिए,

टहलने जाइये, 

लाइट कसरत करिये,

व्यस्त रहिये,  

खुश रहिये,

शरीर से ज्यादा मन को सुंदर रखिये

मंगलवार, 1 फ़रवरी 2022

*खुद को समर्पित* ☺️💐

आज चाय के साथ पकोड़े खाने का मन हुआ, फिर सोचा घर मे किसी को पसंद ही नही पकोड़े खाना, तो अपने लिए क्या बनाऊ.... चाय ली और दो बिस्कुट लेकर बैठ गई.... सुबह से शाम तक का सोचने लगी.... घर मे जो भी बनता है बच्चो या फिर पतिदेव की पसंद का बनता है.... अपनी पसंद का कभी नही बनाया.... खाना मै ही परोसती हूँ.... पर सभी को खिलाने के बाद में खाती हूं, अगर कभी सलाद खत्म हो जाए तो अपने लिए सलाद दोबारा नहीं काटती....सभी की चीजों का  मुझे ही ख्याल रखना होता है.... पर अपनी ही दवाई भूल जाती हूँ.... रात को सारा काम निपटा कर जैसे ही सोने की तैयारी करो तो आवाज़ आती है एक ग्लास पानी तो दे दो... पर अपने लिए पानी लेने खुद ही उठना पड़ता है..... जब सभी का ख्याल रख सकती हूँ.... तो खुद के लिए कुछ क्यों नही कर सकती....

 रोज़ सब के लिए फलों का प्लेट सजाते सजाते एक-आध टुकड़ा मुँह में डाल ली तो डाल ली.....खुद की प्लेट भी बनाई होगी, याद हीं नहीं... 

इतनी लीन हुई ये दुनियादारी में, की दुनियाँ ने इसको सबने टेक इट ग्रांटेड ले लिया....काम से सबने जेसे लक्षण रेखा सी खीच ली.......जकड़ डाला मेने खुद को एक रिवाज में.......इसकी दोषी में खुद ही हूं..... 

वर्ना कहाँ लिखा है... किसने कहा है, कि सब की सेहत का खयाल रखो, लेकिन खुद की नहीं?

*कुछ शब्द अपने लिए*

सजाओ सब की थाली,

वही प्यार वाली।

पर एक और बढ़ा दो,

खुद के नाम की थाली।

काटो तरबूज़, डालो अँगूर,

अपनी प्लेट भी सजाना ज़रूर।

दवाइयाँ देखो है ना सब की,

देखो फिर से एक बार,

अपनी दवाई भूली तो नहीं इस बार।

शाम हुई है,कोई है नहीं पास,

फिर भी बनाओ चाय,

देखो ना, तुम भी हो अपने आप में ख़ास ही हो

कोई कहेगा तब हीं रखोगी,क्या अपना ख्याल

सेहत है तुम्हारी कई बार कहूँ,

कब अपने हिस्से की ज़िन्दगी चखोगी।

दौड़ते भागते, थोड़ी ठहरा करो,

रखो सब का खयाल तुम...

और अपने ख़ातिर भी खुशियों का पहरा धरो।😊😊

सोचा  कभी अपने लिए भी लिखें भीकरो अब अपने भी शौक पूरे,

खुद को भी अपने लिए वक्त दो,

अपना खयाल रखोगी तभी तो

अपनों से जुड़े लोगों का भी रख पाओगी

सोचो सबके लिए पर अपना भी 

@ *मी टाइम *का ख्याल करो


*खुद को समर्पित* ☺️☺️😊😊👍👍👌💐💐💐