शनिवार, 25 जुलाई 2026

*मां से दादी बनने तक का सफ़र*

एक दिन मैंने मेरे भाई के बेटा होने के बाद, यूं ही, अपनी माँ से पूछा - "माँ...आपको दादी बनकर कैसा लगता है?"  मेरी माँ मुस्कुराई, उनके चेहरे पर चमक सी आ गई , उनकी आँखें जैसे, कहीं  ,बहुत दूर सी चली गईं. हो.,उन्होंने बहुत धीरे से कहा - "दादी बनना ऐसा है जैसे ज़िंदगी , एक बार फिर, माँ बनने का मौका दे रही हो...  

लेकिन इस बार ,ये,थोड़ा कम डर के साथ, थोड़ा ज़्यादा सुकून के साथ का पल होता है!  

पहले खुद के बच्चों को बड़ा करने की जल्दी थी, हर बात की चिंता थी,अपनी हर गलती पर डर सा ,भी लगता था..  

पर अब दादी बनने के बाद बस प्यार ही प्यार सा महसूस होता है ! एक सकून सा लगता है दुबारा अपने बेटे के बेटे को देखकर उसी की परछाई नजर आती है,

और ऐसे ही

अब जब मैं , तुम्हारे पोते को ,भी देखती हूँ, तो उसमें  मुझे ,तुम्हारा भी बचपन सा दिखता है !  

उसकी हँसी में तुम्हारी आवाज़, उसकी शरारतों में तुम्हारी परछाई !  

और तब मुझे लगता है कि क्या वक्त इतना  जल्दी गुज़र गया. है...  

कल तक तुम और भैया,दोनों, मेरी उंगली पकड़ कर चलते थे, और आज तुम दोनों , मासूम, का  प्यारा हाथ, थामे खड़ी हो !  

फिर माँ ने दोनों, को सीने से लगाया और मुस्कुराकर कहा -  

"माँ का प्यार इस तरह से कभी खत्म नहीं होता... वो बस इसी तरह एक गोद से ,दूसरी गोद तक, यूं ही  जीवन पर्यन्त चलता रहता है",।


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