बुधवार, 8 मई 2019

**मेरी कहानी मेरी जुबानी**

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मेरी कहानी मेरी ही जुबानीहेलो 👐सभी को मेरा नमस्कार🙏 मैं अनीता सुखवाल उदयपुर की हूं। मेरा पीहर इंदौर है।मैने वनस्पति शास्त्र में एम् एस सी किया है,मेरी होलकर साइंस कॉलेज में, मेरिट में चोथी पोजीशन थी। पी एच डी करते हुए ही, क्यूंकी मेरी शादी उदयपुर हो गई थी, तो वो काम अधूरा रह गया। मैं  पूरी तरह नए  खूबसूरत शहर के ,परिवार में ,जहां का नया माहौल,नया खानपान,नए तरह का पहनाना ओढ़ना, सब तरह के कामो में रच बस सी गई।परिवार मेरा ज्वाइंट है इसलिए काम खूब रहता था फिर भी बहुत बार  जरूर ऐसा लगा ,के मेरी
 पढाई के अनुरूप में कुछ भी नहीं कर पा रही हूं, कई बार नौकरी करू,ऐसा ख़्याल आता था, पर हर बार पतिदेव ने मना किया।बोलते रहते, के घर के काम क्या कम  हैं, जो बाहर जा के करना है l ढेर सारे शौक थे मेरे तो इन्हें में, कैसे और कब पूरे करूंगी ?समझ नही आता था,मन मसोस कर रह जाती थी,धीरे धीरे  समय के साथ दो बेटों का आगमन हुआ,इनकी परवरिश में समय भागा चला गया।आज बडा इंफोसिस में इंजिनियर है और छोटा शेफ  है।इनको देखकर लगता है मैने शायद उस वक्त जिद करके, नौकरी की होती तो आज ये पता भी किस मुकाम पर होते।अब इस उम्र के पड़ाव  मैं अपने तमाम
 शौक पूरे करती हूं।शुरू से ही मेरी तरह तरह की हॉबी रही थी ,इसलिए मैने श्रीनाथी की ग्लास पेंटिंग्स बनाई। अब इसके साथ , मै बच्चो को, सीखाकर अपने समय का सदुपयोग करती हूं और परिवार वालों का भी ख्याल रखती हूं।मुझे कहानियां कविताएं  लिखने का भी खूब शौक है,इसके लिए एक ब्लॉग ,मैने बनाया है ।मुझे ऊनी  क्रोशिए की टोपी बनाने का बहुत शौक है। हर बार ठंड के आगमन के साथ हमारे रिश्तेदारों की ओर दोस्तो को टोपियां बना के देना मेरा शौक है
छोटे बच्चो के बेबी फ्रोक बूटी बनाना मेरे मनपसंद काम है।इसको मैने अब प्रोफ़ेशनल तरीके से भी बनाना शुरू किया है।मैने शायद कोई भी काम के लिए आज तक ना नही किया और  में समझती हूं ,किसी भी काम को सीखना है या सिखाना  है तो इसकी कोई उम्र नहीं होती ।आज भी में समय के साथ  जब भी फ्री  रहती हूं ऑनलाइन खूब सिखती हूं यहां से मुझे अपने शौक के अनुसार बहुत अच्छा सीखना मिल जाता है।और अपने शौक को बच्चो और महिलाओ को सिखाकर बहुत खुश होती हूं। मैने  अभी मात्र  इकसठ वसंत देखे है, पर अभी भी मेरा सीखना और सिखाना कम नहीं पड़ा है।श्रीनाथजी की कला के साथ साथ,मेने हॉबी क्लासेज में करीबन दो सौ एक्टिविटीज , डांस म्यूजिक के सारे काम सिखाना शुरू किए है, जिसमें में अपने आप को व्यस्त  रखती हूं। शायद मेरे  यही जीवन का सार है। बस सीखो और खूब सिखाओ ।



#hobby classes
#hobbyideas
#danceclasses
#musiclasses
#shrinathjiart
#shridarshan
#canwaspainting
#glasspainting
#wollenart
#quillingarts
#pencilsketching
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#computerclass
#bestoutofweastsart
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#inspiration








**सोचती हूँ फिर से**

सोचती हूँ फिर से प्यार कर लूँ.
बेरंग सी हो गई है जिंदगी, रंग उसमें चाहत का भर लूं
सोचती हूँ फिर से प्यार कर लूँ..
वो चटक लाल रंग का कुर्ता जो फबता था बेहद मुझपर,
क्यों ना फिर से बक्से से निकाल अलमारी में ऊपर उसको धर लूँ
सोचती हूँ फिर से प्यार कर लूँ.
सजना- संवरना जो मुझको बेहद भाता था, वो आँखों का काजल कितना लुभाता था
क्यों ना आज फिर से थोड़ा सज-संवर लूँ
सोचती हूँ फिर से प्यार कर लूँ.
वो जो मेरी हँसी पूरे घर में गूंज जाती थी और मुझे हंसता देख दादी-बुआ बड़ी बड़ी आंखें दिखाती थी
आज भूल के सारे बंधन फिर दिल खोल कर के हँस लूँ
सोचती हूँ फिर से प्यार कर लूँ.
वो जो मैं अल्हड़ बेपरवाह हुआ करती थी, जो सिर्फ जिंदगी में उम्मीदों के रंग भरती थी
क्यों ना फिर से अपने अंदर उस लड़की को जिंदा कर लूँ
सोचती हूँ फिर से प्यार कर लूँ.
अपनी सारी जिम्मेदारियाँ बेशक निभाऊंगी लेकिन संग ही खुद में वो बचपना भी फिर जगाऊंगी
ये वादा खुद से आज कर लूँ
सोचती हूँ फिर से खुद से प्यार कर लूँ।  😊😊😊😊

मंगलवार, 30 अप्रैल 2019

**मेरी कहानी मेरी जुबानी**

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**मेरी कहानी मेरी जुबानी**
हेलो 👐सभी को मेरा नमस्कार🙏 मैं अनीता सुखवाल उदयपुर की हूं। मेरा पीहर इंदौर है।मैने वनस्पति शास्त्र में एम् एस सी किया है,मेरी होलकर साइंस कॉलेज में, मेरिट में चोथी पोजीशन थी। पी एच डी करते हुए ही, क्यूंकी मेरी शादी उदयपुर हो गई थी, तो वो काम अधूरा रह गया। मैं  पूरी तरह नए  खूबसूरत शहर के ,परिवार में ,जहां का नया माहौल,नया खानपान,नए तरह का पहनाना ओढ़ना, सब तरह के कामो में रच बस सी गई।परिवार मेरा ज्वाइंट है इसलिए काम खूब रहता था फिर भी बहुत बार  जरूर ऐसा लगा ,के मेरी
 पढाई के अनुरूप में कुछ भी नहीं कर पा रही हूं, कई बार नौकरी करू,ऐसा ख़्याल आता था, पर हर बार पतिदेव ने मना किया।बोलते रहते, के घर के काम क्या कम  हैं, जो बाहर जा के करना है l ढेर सारे शौक थे मेरे तो इन्हें में, कैसे और कब पूरे करूंगी ?समझ नही आता था,मन मसोस कर रह जाती थी,धीरे धीरे  समय के साथ दो बेटों का आगमन हुआ,इनकी परवरिश में समय भागा चला गया।आज बडा इंफोसिस में इंजिनियर है और छोटा शेफ  है।इनको देखकर लगता है मैने शायद उस वक्त जिद करके, नौकरी की होती तो आज ये पता भी किस मुकाम पर होते।अब इस उम्र के पड़ाव  मैं अपने तमाम
 शौक पूरे करती हूं।शुरू से ही मेरी तरह तरह की हॉबी रही थी ,इसलिए मैने श्रीनाथी की ग्लास पेंटिंग्स बनाई। अब इसके साथ , मै बच्चो को, सीखाकर अपने समय का सदुपयोग करती हूं और परिवार वालों का भी ख्याल रखती हूं।मुझे कहानियां कविताएं  लिखने का भी खूब शौक है,इसके लिए एक ब्लॉग ,मैने बनाया है ।मुझे ऊनी  क्रोशिए की टोपी बनाने का बहुत शौक है। हर बार ठंड के आगमन के साथ हमारे रिश्तेदारों की ओर दोस्तो को टोपियां बना के देना मेरा शौक है
छोटे बच्चो के बेबी फ्रोक बूटी बनाना मेरे मनपसंद काम है।इसको मैने अब प्रोफ़ेशनल तरीके से भी बनाना शुरू किया है।मैने शायद कोई भी काम के लिए आज तक ना नही किया और  में समझती हूं ,किसी भी काम को सीखना है या सिखाना  है तो इसकी कोई उम्र नहीं होती ।आज भी में समय के साथ  जब भी फ्री  रहती हूं ऑनलाइन खूब सिखती हूं यहां से मुझे अपने शौक के अनुसार बहुत अच्छा सीखना मिल जाता है।और अपने शौक को बच्चो और महिलाओ को सिखाकर बहुत खुश होती हूं। मैने  अभी मात्र  इकसठ वसंत देखे है, पर अभी भी मेरा सीखना और सिखाना कम नहीं पड़ा है।श्रीनाथजी की कला के साथ साथ,मेने हॉबी क्लासेज में करीबन दो सौ एक्टिविटीज , डांस म्यूजिक के सारे काम सिखाना शुरू किए है, जिसमें में अपने आप को व्यस्त  रखती हूं। शायद मेरे  यही जीवन का सार है। बस सीखो और खूब सिखाओ ।
#hobby classes
#hobbyideas
#danceclasses
#musiclasses
#shrinathjiart
#shridarshan
#canwaspainting
#glasspainting
#wollenart
#quillingarts
#pencilsketching
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#arts&crafts
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#stiching
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 #shortstories #instastories #personalblog #antasukhwal
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#inspiratio

सोमवार, 8 अप्रैल 2019

*** औरतों की छोटी-छोटी खुशियां ****

 कुछ नहीं कहती ,कुछ नहीं मांगती कुछ नहीं चाहती
बस छोटी-छोटी  ,खुशियां होती है औरतों की..
जरूरत के सामान के साथ,सब छोड़ के आई है
यादों के पुलिन्दे के सिवाय,कुछ भी नहीं लाई है ।
उस निर्वासन, उस विलगता, उस बिछोह,
उस अकेलेपन का दर्द ,महसूस भी होना जरूरी है ......
पहले ही दिन से सब बदल जाता है
रसोई, आँगन, दरवाजाबाथरूम, छत और रसोई ।
बीस-पच्चीस बरस तक जिस जगह खेली-पली-बढ़ी
वो एक पल में छूट जाता है रह-रहकर बस याद आता है ।
उसे क्या चाहिये,सोना-चांदी, हीरे मोती
मंहगें वस्त्र, धन-दौलत नहीं... नहीं
ये सब मिट्टी है उसके लिये ये सब तो वो संग ही ले आई ।
उसे समानुभूति - सम्मान करने वाला और
बिना कहे समझने वालाएक हमसफर चाहिये...
उसे सच्चा महत्व- प्यार देने वाला और
अकेलापन दूर करने वालाएक अदद दोस्त चाहिये....
वो रहती है, चार दीवारी में सहेजती- समेटती सामान को
वो सँवारती है घर आँगन को वो भी मन-तन से थक जाती है ....
दो मीठे बोल मिटाते हैं,उसकी सारी तकलीफें
यदा-कदा तारीफ से भी वो गुड़फील करती है
क्या हुआ जो समय पर,खाना नहीं बना
क्या हुआ जो किसी दिन,घर पूरा फैला हुआ है
क्या हुआ जो तैयार होने मेंवो थोड़ी देर करती है
वो भी रिमोट हाथ में रखकर,तकिये पर सिर टिकाकर
बगल में मोबाईल रखकर,घण्टों न्यूज देखना चाहती है
वो भी हफ्ते में किसी एक दिन रोजमर्रा के कामों को भूलकर
छह दिनों की ऊर्जा के लिये,अवकाश रखने की हकदार है....
वो याद रखती है, हर तारीख ,दूध की नागा, व्रत- त्यौंहार
वो भूल नहीं पाती है कभी भी,जन्मदिनों को,शादी-ब्याह को
उसे भी हक है कि कोई बताये,उसे भी कोई यादगार लम्हा
दिन-रात में कुछ देर ही सही,पर कोई करें उससे कुछ बातें
मंहगा नेकलैस नहीं चाहिये,उसे सरप्राईज चाहिये नया
एक गुलाब भी उसका चेहरा,खुशी से लाल कर सकता है
जब बना रही हो वो खाना,पसीने ले तरबतर परेशान
धीमे पांव जाकर, छू लेना,से तरोताज़ा कर सकता है....
जब धो रही हो वो कपड़े,अपनी नाजुक हथेलियों से
"सुनों ! कपड़े मैं सुखा दूंगा"सुनना उसे अच्छा लगता है
नमक तेज़ हो या मिर्च,उसने चाहकर तो नहीं किया
हम बना ही नहीं सकते तो,कमियां बताना जरूरी तो नहीं
उसे गुस्सा करने दो,उसे खुलकर बोलने दो
उसे अपनी राय रखने दो,उसे भी उन्मुक्त बनने दो
वो भी एक दिल, दो किड़नी,एक यकृत रखती है
उसकी भी सांस भरती है,घुटने और कमर दुखती है
वो क्यों ना हँसे सबके सामने,वो क्यों ना सोये देर सुबह तक
वो भी आखिर इन्सान है...उसके भी छोटे -छोटे से अरमान हैं ।
कुछ नहीं कहती,कुछ नहीं मांगती
कुछ नहीं चाहती,बस छोटी-छोटी
खुशियां होती है औरतों की..👆🙏🏻🌹

बुधवार, 30 जनवरी 2019

**बेटे भी घर छोड़ जाते हैं**

बेटे भी घर छोड़ जाते हैं
दुनिया की भीड़ में खो जाते है....
अपनी जान से ज़्यादा प्यारा desk top छोड़ कर
अलमारी के ऊपर धूल खाता गिटार छोड़ कर
Gym के dumbles, और बाकी gadgets
मेज़ पर बेतरतीब पड़ी worksheets, pens और pencils बिखेर कर
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं
दुनिया की भीड़ में खो जाते हैं
मुझे ये colour /style पसंद नहीं
कह कर brand new शर्ट अलमारी में छोड़ कर
Graduation ceremony का सूट, जस का तस
पुराने मोज़े, बनियान , रूमाल, (ये भी कोई सहेज़ के रखने वाली चीज़ है )
सब बेकार हम समेटे हैं, उनको परवाह नहीं
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं
दुनियां की भीड़ में खो जाते हैं
जिस तकिये के बिना नींद नहीं आती थी
वो अब कहीं भी सो जाते हैं
खाने में नखरे दिखाने वाले अब कुछ भी खा कर रह जाते हैं
अपने room के बारे में इतनेpossessive होने वाले
अब रूम share करने से नहीं हिचकिचाते
अपने career बनाने की ख्वाहिश में
बेटे भी माँ बाप से बिछड़ जाते हैं
दुनिया की भीड़ में खो जाते हैं
घर को मिस करते हैं, पर कहते नहीं
माँ बाप को 'ठीक हूँ 'कह कर झूठा दिलासा दिलाते हैं
जो हर चीज़ की ख्वाहिशमंद होते थे
अब 'कुछ नहीं चाहिए' की रट लगाये रहते हैं
जल्द से जल्द कमाऊ पूत बन जाने की हसरत में
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं
दुनियां की भीड़ में खो जाते हैं
हमें पता है,
वोअब वापस नहीं आएंगे, आएंगे तो छुट्टी मनाने
उनके करियर की उड़ान उन्हें दूर कहीं ले जाएगी
फिर भी हम रोज़ उनका कमरा साफ़ करते हैं
दीवारों पर चिपके पोस्टर निहारते हैं
संजोते हैं यादों में उन पलों को,
जब वो नज़दीक थे, परेशान करते थे
अब चाह कर भी वो परेशानी नसीब में नहीं
क्योंकि
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं
दुनियां की भीड़ में खो जाते हैं ।।



ये मेने कहीं पढ़ी हे अच्छी लगी इसलिए यह डाली हे

शनिवार, 1 दिसंबर 2018

जातिवाद****


उसने पूछा तेरी जाति क्या है?
मैंने भी पूछा : एक मां की या एक महिला की ..?
उसने कहा - चल दोनों की बता ..
और कुटिल मुस्कान बिखेरी ।
मैंने भी पूरे धैर्य से बताया.......
एक महिला जब माँ बनती  है तो वो जाति विहीन हो जाती है..
उसने फिर आश्चर्य चकित होकर पूछा - वो कैसे..?
मैंने कहा .....
जब एक मां अपने बच्चे का लालन पालन करती है,
अपने बच्चे की गंदगी साफ करती है ,
तो वो शूद्र हो जाती है..
वो ही बच्चा बड़ा होता है तो मां बाहरी नकारात्मक ताकतों से उसकी रक्षा करती है, तो वो क्षत्रिय हो जाती है..
जब बच्चा और बड़ा होता है, तो मां उसे शिक्षित करती है,
तब वो ब्राह्मण हो जाती है..
और अंत में जब बच्चा और बड़ा  होता है तो मां
उसके आय और व्यय में उसका उचित मार्गदर्शन कर
अपना वैश्य धर्म निभाती है ..
तो हुई ना एक महिला या मां जाति विहीन..
मेरा उत्तर सुनकर वो अवाक् रह गया । उसकी आँखों में
मेरे या हम महिलाओं या माँओं के लिए सम्मान व आदर का भाव था और मुझे अपने मां और महिला होनेपर पर गर्व का अनुभव हो रहा था।

मंगलवार, 13 नवंबर 2018

*लफ़्ज़ों के खेल*

एक सहेली ने दूसरी सहेली से पूछा:- बच्चा होने की खुशी में तुम्हारे पति ने तुम्हें क्या तोहफा दिया ?
सहेली ने कहा - कुछ भी नहीं!
उसने सवाल करते हुए पूछा कि क्या ये अच्छी बात है ?
क्या उस की नज़र में तुम्हारी कोई कीमत नहीं ?
*लफ्ज़ों का ये ज़हरीला बम गिरा कर वह सहेली दूसरी सहेली को अपनी फिक्र में छोड़कर चलती बनी।।*
थोड़ी देर बाद शाम के वक्त उसका पति घर आया और पत्नी का मुंह लटका हुआ पाया।।
फिर दोनों में झगड़ा हुआ।।
एक दूसरे को लानतें भेजी।।
मारपीट हुई, और आखिर पति पत्नी में तलाक हो गया।।
*जानते हैं प्रॉब्लम की शुरुआत कहां से हुई ? उस फिजूल जुमले से जो उसका हालचाल जानने आई सहेली ने कहा था।।*
रवि ने अपने जिगरी दोस्त आकाश से पूछा:- तुम कहां काम करते हो?
आकाश- फला दुकान में।। रवि- कितनी तनख्वाह देता है मालिक?
आकाश-18 हजार।।
रवि-18000 रुपये बस, तुम्हारी जिंदगी कैसे कटती है इतने पैसों में ?
आकाश- (गहरी सांस खींचते हुए)- बस यार क्या बताऊं।।
*मीटिंग खत्म हुई, कुछ दिनों के बाद आकाश अब अपने काम से बेरूखा हो गया।। और तनख्वाह बढ़ाने की डिमांड कर दी।। जिसे मालिक ने रद्द कर दिया।। आकाश ने जॉब छोड़ दी और बेरोजगार हो गया।। पहले उसके पास काम था अब काम नहीं रहा।।*
एक साहब ने एक शख्स से कहा जो अपने बेटे से अलग रहता था।। तुम्हारा बेटा तुमसे बहुत कम मिलने आता है।। क्या उसे तुमसे मोहब्बत नहीं रही?
बाप ने कहा बेटा ज्यादा व्यस्त रहता है, उसका काम का शेड्यूल बहुत सख्त है।। उसके बीवी बच्चे हैं, उसे बहुत कम वक्त मिलता है।।
पहला आदमी बोला- वाह!! यह क्या बात हुई, तुमने उसे पाला-पोसा उसकी हर ख्वाहिश पूरी की, अब उसको बुढ़ापे में व्यस्तता की वजह से मिलने का वक्त नहीं मिलता है।। तो यह ना मिलने का बहाना है।।
*इस बातचीत के बाद बाप के दिल में बेटे के प्रति शंका पैदा हो गई।। बेटा जब भी मिलने आता वो ये ही सोचता रहता कि उसके पास सबके लिए वक्त है सिवाय मेरे।।*
*याद रखिए जुबान से निकले शब्द दूसरे पर बड़ा गहरा असर डाल देते हैं।। बेशक कुछ लोगों की जुबानों से शैतानी बोल निकलते हैं।। हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बहुत से सवाल हमें बहुत मासूम लगते हैं।।*
जैसे-
*तुमने यह क्यों नहीं खरीदा।।*
*तुम्हारे पास यह क्यों नहीं है।।*
*तुम इस शख्स के साथ पूरी जिंदगी कैसे चल सकती हो।।*
*तुम उसे कैसे मान सकते हो।।*
वगैरा वगैरा।।
इस तरह के बेमतलबी फिजूल के सवाल नादानी में या बिना मकसद के हम पूछ बैठते हैं।।
जबकि हम यह भूल जाते हैं कि हमारे ये सवाल सुनने वाले के दिल में
नफरत या मोहब्बत का कौन सा बीज बो रहे हैं।।
आज के दौर में हमारे इर्द-गिर्द, समाज या घरों में जो टेंशन होता जा रहा है, उनकी जड़ तक जाया जाए तो अक्सर उसके पीछे किसी और का हाथ होता है।।
वो ये नहीं जानते कि नादानी में या जानबूझकर बोले जाने वाले जुमले किसी की ज़िंदगी को तबाह कर सकते हैं।।
इसलिएकोशिश हो,किऐसी हवा फैलाने वाले हम ,नही बने।