बुधवार, 20 जुलाई 2022
ख़्वाब
रविवार, 17 जुलाई 2022
*हुनर अपनाअपना*
शनिवार, 16 जुलाई 2022
What is BF?
बुधवार, 13 जुलाई 2022
😃काश! 😞
सोमवार, 11 जुलाई 2022
*अंजाना रिश्ता*
शुक्रवार, 15 अप्रैल 2022
मेरी कलम
मेरी कलम से मेरा है नाता पुराना
बचपन से अब तक है अपना याराना
जब जब हम साथ हैं होते
एहसास शब्दों में पिरों से जाते
मन के ख्यालों में एक लहर सी उठती
वो विचार कलम के जरिए पन्नों में उतरती
हर बार नए विचार हैं उभरतें
कलम के संग मिलकर हैं पूरें होते
कभी अलग रूप कभी अलग किरदार
तेरे कारण कविता लिखती जोरदार
तुम मेरी भावनाएं मेरी ख्यालात लिखती
मेरे अनछुए सब जज्बात लिखती
जिन विचारों में मैं खोई सी रहती
उनको तुम यथार्थ रूप देती
दुनिया कहां समझ है पाती
सजिवता का तुम एहसास कराती
खुद का परिचय कहां है देती
ये तो हमारा ही परिचय करवाती
हर गम को है लिख देती
खुशी बयां है कर देती
सब के विचारों को झकझोरती
समाज में बदलाव है लाती
जो हम जुबां से कह ना पाते
वह कलम सब कुछ है कह देती
युग परिवर्तक हो जाती तेरी छवि
सृजन में तुम हो जाती मेरी कवि
माना तुम हो निर्जीव सी
पर कांति लाती हो सजीव सी
अपनी धुन में जब चलती हो
बहुतों के मन को खलती हो
सबको अधिकार दिलाती हो
सबका भविष्य उज्जवल बनाती हो
तुम जन-जन की हो आवाज
मेरे मन का बन जाती साज
आज भी तुम बहुत ही याद आती हो
कागज पर ना सही ख्यालों में तो आती हो
(अंजना सिंग जी की लिखी हुई है)
शनिवार, 19 फ़रवरी 2022
*मर चुकी इंसानियत*
सर्दियों के मौसम में एक बूढी औरत अपने घर के कोने
में ठंड से तड़फ रही थी।।
जवानी में उसके पति का देहांत हो गया था
घर में एक छोटा बेटा था, उस बेटे के उज्जवल भविष्य के
लिए
उस माँ ने घर-घर जाकर काम किया
काम करते-2 वो बहुत थक जाती थी,
लेकिन फिर भी आराम
नही करती थी वो सोचती थी जिस
दिन बेटा लायक हो जाएगा उस दिन आराम करूंगी।।
देखते-2 समय बीत गया!
माँ बूढी हो गयी और बेटे
को अच्छी नौकरी मिल गयी।
कुछ समय बाद बेटे की शादी कर
दी और एक बच्चा हो गया।
अब बूढी माँ खुश थी कि बेटा लायक
हो गया
लेकिन ये क्या
बेटे व बहू के पास माँ से बात करने तक का वक़्त
नही होता था
बस ये फर्क पड़ा था माँ के जीवन में
पहले वह बाहर के लोगो के बर्तन व कपड़े
धोती थी। अब अपने घर में बहू-बेटे
के...
फिरभी खुश थी क्योंकि औलाद
उसकी थी
सर्दियों के मौसम में एक टूटी चारपाई पर, बिल्कुल
बाहर वाले कमरें में एक फटे से कम्बल में सिमटकर
माँ लेटी थी
और सोच रही थी
आज बेटे को कहूँगी तेरी माँ को बहुत
ठंड लगती है एक नया कम्बल ला दे।।
शाम को बेटा घर आया तो माँ ने बोला...
बेटा मै बहूत बूढी हो गयी हूँ,
शरीर में जान नही है, ठंड सहन
नही होती मुझे नया कम्बल ला दे।
तो बेटा गुस्से में बोला, इस महीने घर के राशन में और
बच्चे के एडमिशन में बहुत खर्चा हो गया!
कुछ पैसे है पर तुम्हारी बहू के लिए शॉल लाना है
वो बाहर जाती है। तुम तो घर में
रहती हो सहन कर सकती हो।।
ये सर्दी निकाल लो, अगले साल ला दुंगा।।
बेटे की बात सुनकर माँ चुपचाप सिमटकर कम्बल में
सो गयी
अगले सुबह देखा तो माँ इस दुनियाँ में
नही रही...
सब रिश्तेदार, पड़ोसी एकत्रित हुए, बेटे ने
माँ की अंतिम यात्रा में कोई
कमी नही छोड़ी थी।
माँ की बहुत
अच्छी अर्थी सजाई थी!
बहुत महंगा शॉल माँ को उढाया था।।
सारी दुनियां अंतिम संस्कार देखकर कह
रही थी।
हमको भी हर जन्म में भगवान
ऐसा ही बेटा मिले!
मगर उन लोगो को क्या पता था कि मरने के बाद
भी एक
माँ तडफ रही थी।।।